Thursday, October 14, 2010
Monday, September 6, 2010
बिहार चुनाव का ऐलान.............
लम्बे इंतजार के बाद आखिरकार बिहार विधानसभा चुनाव की तारिखों की घोषणा कर दी गई...नीतीश कुमार,लालू प्रसाद यादव औऱ रामविलास पासवान इनमें से एक भी नेता एसा नही जिसका दामन एकदम साफ हो...लालू की तुलना भ्रष्टाचार से करना ही, भ्रष्टाचार की तौहीन है...पासवान की राजनीतिक जमीन तो पहले से ही खिसक चुकी है...अब लालू के कंधे पर बैठकर बिहार की बैतरिणी पार करना चाहते है...और रही बात विकास पुरुष का दावा करने वाले नीतीश को तो...जाते-जाते वो भी अपने दामन में दाग लगावा बैठे...लेकिन बात दाग की नही है...बात तो अब शुरु होगी अब..जब जनता को वोट के नाम पर बांटा जाएगा...जनता को बाटने जाएगा जाति के नाम पर...पैसे से वोट खरीदे जाएगे औऱ बूथ लूटे जाएगें....लेकिन जनता करे तो क्या करें...एक ओर नक्सली और एक ओर सफेद कुर्ताधारी गुंडे जो कन्वर्ट होकर नेता बन गए है...बात अगर बिहार के पुराने नेताओं की करें तो कुछ गिने-चुनें ही साफ सुथरी छवि के दिख जांएगें ॥लेकिन उनकी तो बिहार में चलती नही...जब लालू जैसे नेता जो बिहार को रेलवे की ही तरह विकास की पटरी पर दौडानें की बात कर रहे है लेकिन वोट के लिए सहाबुद्दीन जैसे गुंडों से मिलने पहुंच जाते हैं...ऐसे लालू पर जनता भरोसा करे तो कैसे...पासवान को सिर्फ दिल्ली दिखती है और नीतीश भी अब दूध के धुले नही रहे...जनता सब जानती है॥बाढ से लेकर सुखे ने जनता को पहले ही तबाह कर रखा है...विकल्प में सारे चोर है ॥चुने तो चुने किसे...लेकिन इस बार तो शख्त कदम उठाने ही पडेगें अब कोई उपाय नहीं...इस बार अगर चुक गए तो एक बार फिर बिहार लूट जाएगा॥चोरों को पहचानों और ऐसे चोरों को चुनों जो इन सबमें इमानदार हो........
Monday, June 7, 2010
बेईमानो की दुनिया में बड़ा मुश्किल है इमानदार रहना
पिछले कई दिनों से इमानदारो की तरह जीने को मन करता है। सभी लोग ईमानदारी की जिन्दगी जीने की सलाह देते है मगर कोई इमानदार नही रह पाता। सच की बुनियाद पर जिन्दगी खड़ा करने के लिए मैंने अपने घर में सच का एक खेल खेला जिसकी सजा मुझे यु मिली की हम अपने ही घर वालो से दूर हो गये । अब जो बच्चे है ओ भी हमें सिखाने की कोशिश करते जैसे मैंने कोई गुनाह कर दिया हो । लेकिन मैंने सिर्फ अपनी जिन्दगी ईमानदारी से जीने के लिए एक सच बोला था। अगर मैंने झूठ बोला होता तो आज सब खुश होते। तो क्या गुनाह कर दिया मैंने क्या अपने जाति से बाहर और खुद की मर्जी से शादी करना इतना बड़ा गुनाह है की जो हमें इतने अरमानो से पाले , पढाया -लिखाया आज ओ ही मुझे पराया बना दिए है । माँ तो मान भी जाती है पर क्या पिता इतने कठोर हो सकते है जो अपने बेटे से ४महिनो तक बात ही नही करते। सोचा था इन जज्बातों को अपने सीने में ही दफना दूंगा लेकिन आज मान बड़ा बोझिल है । कई दिनों से ये बाते मुझे सालती रहती है । मुझे पता है किसी को मेरी ये बाते बहुत बुरी लगेगी क्योकि ओ नहीं चाहती की हमारे घर की बाते लोगो तक पहुचे लेकिन मै चाहता हु की ओ मेरी बातें ,मेरे मन के भीतर चल रहे द्वन्द को भी समझे हलाकि मुझे पता ही की ओ सब जानती है। फिर भी मै ये साबित कर दूंगा मै सही हु । कोई भी माँ बाप अपने बेटे या बेटी की ख़ुशी में ही खुश होता है । लेकिन दुसरे लोग जो खुद के बेटे बेटी की चिंता न कर दुसरो की दुनिया में दखल देने की नाकाम कोशिश करते रहते है। मेरा ये कहानी सुनाने का मकसद सहनुभूति लेना नही है ,और ना ही मुझे सहानुभूति की जरुरत है । मै बस लोगो को ये बताना चाहता हु की आखिर कब तक आप दुसरो के लिए अपने बच्चो से नाराज रहेगे ? मेरा मकसद है उन माँ बाप को ये बताना की आप दुसरो की ख़ुशी के लिए अपने बच्चो की ख़ुशी छीन लेते है । आपके बच्चे आपसे दूर रहकर खुश नही रहते और ना आप ही खुश रह पाते है लेकिन आप क्यों दुनिया की खातिर आपनो से दूर है ?...............
Saturday, March 13, 2010
महिला आरक्षण या महिला का अपमान
महिला आरक्षण के मुद्दे पे यादवो ने जो एकता दिखने की कोशिश की है या दिखा रहे है अगर यही एकता यादवो के बिकास के लिए दिखाते तो सायद यादवो का कुछ भला हो हो जाता। लालू ,मुलायम और शरद को शायद ये नही पता की यादव अब उनकी बातों में नही आने वाले है। यादवो के नाम पर अब तक राजनितिक रोटिया सेकने वाले ये नेता अभी भी अनपढ़ यादवो को बेवकूफ बना रहे है । सिर्फ अपने परिवार की चिंता करने वाले ये यादव नेता बाकि कितने यादवो को राजनीति में आगे लाये है ? इन्हें तो सिर्फ अपने परिवार की चिंता है और अब जब इन्हें अपनी लुटिया डूबती नजर आ रही है तो ये महिलाओ के नाम पर राजनितिक रोटिया सेकना चाहते है । लेकिन मेरे प्यारे यादव भाइयो अब जनता होसियार हो गई है । जातिवाद और धर्म की राजनीति से ऊपर आ जाओ और देश में गरीबो के लिए कुछ आवाज उठा लो । महिला बिल पे हल्ला मचाने वाले लालू भैया उस समय कहा था आपका विरोध जब राबरी जी को मुख्यमंत्री बना दिए थे । कोटे के अन्दर कोटे को लाकर अभी और कितने बटवारे करने का मूड है आपका । और नेताजी आपको तो खुश होना चाहिए आपकी बहु डिम्पल आरक्षण मिलते ही सांसद बन जाएगी कम से कम उन्हें हराने वाला कोई पुरुष नेता तो नही होगा । क्या कर रहे हो यादव भाइयो महिला का अपमान या इज्जत ?
Saturday, November 14, 2009
देवो की भूमि बनी फ्राडों की भूमि
देरादून आज कल फ्रोडगिरी का अड्डा बन गया है । पिछले एक माह से रोज अख़बार में यैसे ही चर्चे दीखते है । देहरादून में नई-नई प्लेसमेंट एजेन्सीया और इंसोरेंस के नाम पर हजारो लोगो को ठगा जा चुका है पर पुलिस एक भी फ्रोड को पकड़ नही सकी है । और तो और हद तो तब हो गई जब पुलिस का एक जवान ही गायब हो गया, बाद में भाई साहब चोरी की कार बेचते हुए पकड़े गए .येसी है अपने आप को मित्र पुलिस कहने वाली देहरादून पुलिस । ख़ुद को विजय आनन्द शर्मा बताने वाला एक ब्यक्ति निति नाम की एक लड़की के साथ मिलकर मंगलाचरणम नाम की एक कंपनी खोला और इन्सुरेंस ने नाम पर बिडला इंसोरेंस कम्पनी के इसुरेंस कराया और पैसे इक्कठे करके चंपत हो गया । हजारो लोगों को बेवकूफ बनाकर जाने वाले इस आनंद को पुलिस आजतक नही पकड़ सकी । यैसे ही कारनामे रोज सामने आ रहे है ...और पुलिस हाथ पे हाथ धरे बैठी है ..
Monday, October 26, 2009
वाह रे ..डाक्टर ....
भगवान का दूसरा रूप माने जाने वाले डॉक्टर बेशक लोगो की जान बचाते है ...पर कुछ झोला छाप तथाकथित डॉक्टर भगवान के रूप माने जाने वाले डॉक्टरो को बदनाम कर रहे है ....और लोग मजबूरी में इनके पास जाते है । गावों की हालत तो छोडिए देश की राजधानी में हालत ख़राब है । मै आजकल देहरादून में जॉब कर रहा हूँ ..दिवाली की छुट्टी के लिए अपने घर देवरिया जाने के लिए मैंने बस लिया ..ट्रैफिक के कारण मुझे २४ घंटे लगे बस में जहाँ मच्छरों ने जम कर मेरा स्वागत किया और दिवाली के रात मुझे कपकपी के साथ बुखार आया । अगली सुबह गावं के एक डॉक्टर से दवा लिया उसने मुझे मलेरिया की दवा दी । फ़िर भी बुखार नही गया तो मै दुसरे डॉक्टर के पास गया उसने सारा जाँच कराने के बाद कहा की वायरल है फ़िर भी मुझे आराम नही हुआ और दिन पर दिन मेरी हालत ख़राब होती गई ..परेशान होकर मै किसी तरह दिल्ली पंहुचा । दिल्ली के हरिनगर आश्रम में एक अस्पताल में गया वह डॉ अंसारी ने मुझे पीलिया बताया और हजार रूपये येठे फ़िर भी कुछ आराम नही हुआ और मेरी हालत चिंताजनक हो गई। फ़िर मै अशोक विहार में नार्थ डेल्ही नर्सिंग होम में गया जहा पता चला की मुझे डेंगू है और ५ दिन अस्पताल में भर्ती रहा तब जाके पुरी तरह ठीक हुआ और जान बची ...अब सवाल ये है की मै किस किस पे केस करू ॥ मै एक पत्रकार हु जब मेरे साथ येसा हुआ तो आम लोग की तो आप कूद सोच ले क्या हाल..सरकारी अस्पताल में कोई डॉक्टर नही मिलता लोग जाए तो जाए कहा जाए ..अब सवाल ये है की मेरी जिन्दगी से जो मजाक किया गया और मुझे १५ हजार रूपये खर्च करने पड़े उसके लिए कौन जम्मेदार है ...एक भी गुनाहगार को मै छोड़ने वाला नही..
देहरादून से गोरखपुर बस से जाते समय
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