Wednesday, November 3, 2010

ओबामा देखेगें....दीपावली....या...

ये दिवाली दिलों का मेल कराती है....यहीं संदेश देने की कोशिश की जा रही है...ओबामा की भारत यात्रा के जरिए...लेकिन इस बीच एक विवाद की शुरुआत कर दी है...लखनऊ के शिया नेता सैयद कल्वे ने...कल्वे को ओबामा के मुसलमान मानने से भी एतराज है...लखनऊ में कल्वे ने ये एलान कर दिया की वो ओबामा की भारत यात्रा का विरोध करेगें...लेकिन सवाल ये है कि इस विरोध का मतलब क्या है...अगर वो ओबामा को मुसलमानों का दुश्मन मानते है औऱ ओबामा को आतंकवाद का जिम्मेदार मानते है तो क्या सभी भारतीय मुसलमान उनके इस बयान से सहमत है? अगर नही तो क्या कल्वे के इस बयान को महज पब्लिसीटि स्टंट मान लेना सही है? जबाब कई है लेकिन ओबमा की यात्रा को लेकर जिस तरह की तैयारियां की जा रही हैं और मीडिया जिस तरह से इसे महाखबर बनाने में लगा है...वो अपने आप में एक सवाल पैदा कर दिया है...दीवाली के मौके पर कितने गरीब घरों में दीप नहीं जल पाएगें॥कितनें घरों में पकौड़े तलने के लिए तेल उधार लिए जाएगें...किसी को इसकी चिंता है...क्या इंडिया साइनिंग का नारा लगाने वालों को इसका जरा भी ख्याल है....जरा सोचिए उन परिवारों के बारे में और दिवाली पर करोड़ो रुपए के पटाखे धुंआ में उड़ाने और पॉलुसन फैलाने के बजाय किसी एक परिवार के घर को रौशन करे...मेरे ख्याल से ये दिवाली दिल को ज्यादा सुकून देगी...इस कानफोडू पटाखों से......